बदलता बिहार’ कर रहा जागरूक और सशक्त
सिवान में स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत जून महीने को ‘मलेरिया रोकथाम माह’ के रूप में मनाया जा रहा है। यह पहल न केवल जिले को इस गंभीर बीमारी से मुक्त करने पर केंद्रित है, बल्कि 2030 तक भारत को मलेरिया मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में सिवान के योगदान को भी सुनिश्चित करती है।
घर-घर जागरूकता अभियान: स्वास्थ्यकर्मी बन रहे उम्मीद की किरण
इस व्यापक अभियान के केंद्र में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) और आशा कार्यकर्ता जैसी अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी हैं। वे गांवों और टोलों में घर-घर जाकर लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस दौरान मलेरिया के सामान्य लक्षणों जैसे तेज़ बुखार, कंपकंपी (ठंड लगना), सिरदर्द, उल्टी और मांसपेशियों में दर्द के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही, यह भी समझाया जा रहा है कि इन लक्षणों के दिखने पर बिना देर किए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर निःशुल्क जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें। स्व-चिकित्सा से बचने की विशेष अपील की जा रही है।
मच्छरों पर वार: बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। स्वास्थ्यकर्मी लोगों को मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, खासकर रात में सोते समय, और पूरी बांह के कपड़े पहनने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा, घरों के आसपास और मोहल्लों में पानी जमा न होने देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य स्रोत होता है। कूलरों, गमलों और पुराने टायरों में जमा पानी को नियमित रूप से खाली करने या बदलने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। गंदे पानी की उचित निकासी और साफ-सफाई बनाए रखना मलेरिया फैलाने वाले मादा ‘एनोफिलीज’ मच्छरों की संख्या को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
सिवान की मलेरिया मुक्त राह: एक सकारात्मक पहल
यह उल्लेखनीय है कि 2021 में सिवान समेत बिहार के कई जिलों में मलेरिया का कोई नया मामला सामने नहीं आया था, जो स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निवासियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम था। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सही दिशा में किए गए प्रयास रंग लाते हैं। वर्तमान अभियान इस सफलता को बनाए रखने और सिवान को स्थायी रूप से मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
badltabihar.in के माध्यम से हम अपने सभी पाठकों से अनुरोध करते हैं कि वे इस जन-जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। आपकी थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता न केवल आपको बल्कि आपके परिवार और पूरे समाज को मलेरिया जैसी घातक बीमारी से बचा सकती है। याद रखें, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ – मलेरिया के संदर्भ में यह बात पूरी तरह लागू होती है। आइए, मिलकर एक स्वस्थ और समृद्ध बिहार का निर्माण करें!