जानकी मंदिर परियोजना 2025: योजना, महत्व और पूरी जानकारी

जानकी मंदिर परियोजना 2025

जानकी मंदिर परियोजना 2025 का भव्य शुभारंभ 8 अगस्त को हुआ। जानें ऐसा क्या खास है जिसकी वजह से यह मंदिर बिहार का सबसे बड़ा धार्मिक व पर्यटन आकर्षण बनेगा।

आज 8 अगस्त 2025 की सुबह बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुनौरा धाम में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ। जानकी मंदिर परियोजना 2025 का शिलान्यास एक भव्य समारोह में किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुणौरा धाम से वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर मौजूद रहे और शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया।

पुनौरा धाम, जिसे माता सीता की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है, आज हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से भर गया था। सुबह से ही मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे माहौल पूरी तरह धार्मिक और उत्सवमय हो गया।

परियोजना का उद्देश्य

जानकी मंदिर परियोजना 2025 का उद्देश्य केवल एक मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई बड़े लक्ष्य हैं:

  • धार्मिक पहचान को मजबूत करना – माता सीता के जीवन और आदर्शों को संरक्षित करना।
  • पर्यटन को बढ़ावा देना – राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को आकर्षित करना।
  • स्थानीय विकास – रोजगार के अवसर पैदा करना, होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देना।
  • सांस्कृतिक संरक्षण – मिथिला और बिहार की संस्कृति, कला और परंपराओं का प्रचार-प्रसार।

आज के कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • सुबह 9:00 बजे – श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में आगमन शुरू।
  • सुबह 9:45 बजे – मंच पर विशेष अतिथियों का आगमन।
  • सुबह 10:00 बजे – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का वर्चुअल संबोधन, जिसमें उन्होंने इस परियोजना को “भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने वाला कदम” बताया।
  • सुबह 10:15 बजे – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया।
  • सुबह 10:30 बजे – वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान के बीच भूमि पूजन संपन्न।
  • सुबह 11:00 बजे – सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय कलाकारों का प्रदर्शन।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  1. भव्य स्थापत्य कला – मंदिर का डिज़ाइन भारतीय पारंपरिक और आधुनिक स्थापत्य कला का संगम होगा, जिसमें मिथिला चित्रकला और नक्काशी विशेष आकर्षण होंगे।
  2. विस्तृत क्षेत्रफल – परियोजना लगभग 67 एकड़ भूमि पर फैली होगी, जिसमें मुख्य मंदिर, प्रांगण और सहायक संरचनाएं शामिल होंगी।
  3. यात्री सुविधाएं – आधुनिक यात्री आवास, भोजनालय, सांस्कृतिक केंद्र, संग्रहालय, बगीचे और पर्याप्त पार्किंग सुविधा।
  4. डिजिटल तकनीक – वर्चुअल दर्शन, डिजिटल गाइड सिस्टम और इंटरएक्टिव डिस्प्ले बोर्ड।
  5. सुरक्षा व्यवस्था – सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी और आपातकालीन चिकित्सा केंद्र।

लागत और समयसीमा

जानकी मंदिर परियोजना 2025 की अनुमानित लागत लगभग 500 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य 2025 में शुरू होकर 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार और स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि परियोजना समयसीमा के भीतर पूरी होगी और गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होगी।

धार्मिक पर्यटन पर प्रभाव

इस परियोजना के पूरा होने के बाद सीतामढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

  • राष्ट्रीय स्तर पर – अयोध्या, वाराणसी और मथुरा की तरह पुनौरा धाम भी प्रमुख धार्मिक स्थल बन जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर – नेपाल, श्रीलंका और अन्य देशों के श्रद्धालु यहां आएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा।
  • आर्थिक लाभ – होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवल एजेंसी और स्थानीय व्यवसाय में भारी वृद्धि होगी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

पुनौरा धाम और आसपास के गांवों के लोगों में इस परियोजना को लेकर गहरा उत्साह है।

  • कई लोगों ने कहा कि यह केवल धार्मिक स्थल नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र के विकास का प्रतीक बनेगा।
  • युवाओं का मानना है कि यहां रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • महिलाएं उम्मीद कर रही हैं कि मंदिर आने वाले समय में महिला-समूह आधारित व्यापार को भी बढ़ावा देगा।

मिथिला संस्कृति और जानकी मंदिर

मिथिला क्षेत्र का नाम आते ही माता सीता की छवि सामने आ जाती है। जानकी मंदिर परियोजना 2025 इस संस्कृति को संरक्षित करने का माध्यम बनेगा। मंदिर के अंदर मिथिला पेंटिंग, शिल्प और ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रदर्शित करने वाला संग्रहालय भी बनाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत को जान सकें।

निष्कर्ष

8 अगस्त 2025 की यह सुबह बिहार के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। जानकी मंदिर परियोजना 2025 सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक विकास और सामाजिक एकता का प्रतीक बनने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह मंदिर न केवल बिहार, बल्कि पूरे भारत के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा।

Badlta Bihar लगातार आपको बिहार के विकास, संस्कृति और ऐतिहासिक परियोजनाओं की ताज़ा खबरें देता रहेगा।

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